कस्ती चली दिन रात....

 कस्ती चली दिन रात रे

कस्ती चली दिन रात रे,

मांझी ढूंढे पतवार रे

कस्ती चली दिन रात रे,

लहरो से करती बात रे

कस्ती चली दिन रात रे,

हवाओ को लेके साथ रे

कस्ती चली दिन रात रे,

अपनी रहो को पहचान रे

कस्ती चली दिन रात रे,

पंछियों से करती  बात रे

कस्ती चली दिन रात रे,

अपने सपनों के साथ रे

कस्ती चली दिन रात रे,

मांझी ढूंढे पतवार रे

कस्ती चली दिन रात रे.........




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